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Vyakaran + bhasha

Kriya / visheshan / sarvanam notes

Ready

क्रिया / विशेषण / सर्वनाम

Kriya / visheshan / sarvanam is a topic in Hindi General (Vyakaran + bhasha) for RVUN JA / CA-II (RVUN/Rectt.-2026-27/03).

विषय 4 · हिंदी व्याकरण, कक्षा-10। काम = क्रिया। गुण/गिनती = विशेषण। संज्ञा की जगह = सर्वनाम। कारक पीछे (ने/को/से); विलोम आगे। काल की पूरी तालिका यहाँ नहीं।

इस विषय में क्या आता है

परीक्षा पूछती है — सोना सकर्मक है या अकर्मक, खा लिया सरल है या संयुक्त, पढ़वाना कौन-सी क्रिया, धीरे विशेषण है या क्रिया-विशेषण, पहला कौन-सा विशेषण, यह आया और यह लड़का में «यह» एक घर के नहीं, अपनी किताब कौन सर्वनाम। तीन शब्द-भेद एक साथ: काम, गुण, बदली हुई संज्ञा।

यहाँ पढ़ना है

धातु। सकर्मक, अकर्मक, द्विकर्मक, उभयविध। संयुक्त और सहायक। प्रेरणार्थक दो स्तर। समापिका / पूर्वकालिक। विशेषण चार भेद + अवस्था। क्रिया-विशेषण। चार अव्यय। सर्वनाम छह भेद। यह/जो/आप के जाल।

यहाँ नहीं घुसाना

ता+है / रहा / चुका / था / गा — काल। ने+खाई का मेल भी वहीं। कर्ता–कर्म–करण के नाम — कारक (मैंने, मुझे रूप वहीं)। अच्छा/अच्छी का पूरा मेल — लिंग–वचन। लेखक/लिखाई — कृत्। कर्तृ–कर्म–भाव वाच्य = परिवर्तन-पृष्ठ। विलोम — अपना पृष्ठ।

एक पंक्ति: क्रिया = काम या होना। विशेषण = संज्ञा का गुण/गिनती/माप। सर्वनाम = संज्ञा की जगह बैठा शब्द। क्रिया-विशेषण विशेषण नहीं — वह क्रिया का साथी है।

क्रिया क्या है

क्रिया उस शब्द को कहते हैं जिससे कोई काम होना, करना या होना-भर सूचित हो। बिना क्रिया के वाक्य अधूरा: «सुंदर फूल» बात नहीं; «फूल खिले» बात है।

  • काम: खाना, दौड़ना, लिखना, मारना
  • अवस्था / होना: है, था, होना, रहना, दिखना
  • आज्ञा भी क्रिया: जाओ, बैठो

विकारी शब्दों में क्रिया वह है जिसका रूप कर्ता (कभी कर्म) के लिंग–वचन–पुरुष और काल से बदलता है। रूप कैसे बैठे — लिंग और काल वाले पृष्ठ। यहाँ किस तरह की क्रिया।

धातु — क्रिया की जड़

धातु = क्रिया का मूल टुकड़ा, जिस पर प्रत्यय चढ़कर रूप बनते हैं। पढ़ना ← पढ़्। लिखना ← लिख्। जाना ← जा / गम्। करना ← कृ / कर। होना ← भू / हो।

धातु में «ना» नहीं होता। लिखना क्रिया का सामान्य रूप है; धातु लिख् है। कृत् प्रत्यय धातु पर लगते हैं — सूची उपसर्ग–प्रत्यय पर; यहाँ सिर्फ़: क्रिया की जड़ धातु है, संज्ञा की नहीं।

कर्म से भेद — सकर्मक, अकर्मक, द्विकर्मक

कर्म कारक का नाम कारक पर है। यहाँ क्रिया का स्वभाव: क्या यह कर्म माँगती है?

कसौटी: वाक्य में क्या / किसे का सीधा उत्तर बनता है? हाँ → सकर्मक। नहीं → अकर्मक। दो उत्तर (चीज़ + व्यक्ति) → द्विकर्मक।

भेदकर्मउदाहरणजाँच
अकर्मकनहींराम सोया। बच्चा रोया। सूरज निकला। फूल खिले। वह गया।«क्या सोया?» बेकार सवाल
सकर्मकएकराम ने रोटी खाई। सीता पत्र लिखती है। उसने साँप मारा।क्या खाई? रोटी
द्विकर्मकदो (चीज़ + व्यक्ति)माँ ने बच्चे को दूध दिया। गुरु ने शिष्य को पाठ पढ़ाया। उसने मुझे पत्र लिखा।क्या दिया? दूध। किसे? बच्चे को

अकर्मक — रटो, ये ने नहीं माँगते

सोना, रोना, हँसना, जागना, चमकना, खिलना, जाना, आना, होना, रहना, उठना, बैठना, गिरना, दौड़ना (स्वयं), मरना। भूत में राम सोया, नहीं *राम ने सोया — ने-नियम काल पृष्ठ का है; कारण यही अकर्मकता है।

सकर्मक — कर्म खाती हैं

खाना, पीना, लिखना, पढ़ना (किताब), देखना, सुनना, मारना, काटना, तोड़ना, लाना, धोना, बनाना, पूजना, बुलाना।

उभयविध — दोनों चेहरे

कुछ धातुएँ कर्म के बिना भी चलें, कर्म के साथ भी। परीक्षा वाक्य देखकर नाम देती है, शब्द के जन्म से नहीं।

धातुअकर्मक प्रयोगसकर्मक प्रयोग
पढ़नावह सुबह पढ़ता है।वह गीता पढ़ता है।
लिखनाबच्चा लिख रहा है।बच्चा पत्र लिख रहा है।
जीतनाहमारी टीम जीती।हमने मैच जीता।
बोलनावह बोलता है।वह सत्य बोलता है।
खुलना ≠ खोलना। दरवाज़ा खुला = अकर्मक (स्वयं हुआ)। उसने दरवाज़ा खोला = सकर्मक। इसी जोड़ी: टूटना/तोड़ना, जलना/जलाना, पिघलना/पिघलाना। पहला अपने आप, दूसरा किसी ने किया।

रचना से — सरल और संयुक्त

भेदबनावटउदाहरण
सरल / मूलएक धातु के रूपजाता है, खाया, लिखेगी, बैठो
संयुक्तमुख्य क्रिया + सहायक क्रियाजा रहा है, खा लिया, आ गया, मार डाला, पढ़ सकता है, सो चुका

मुख्य काम बताती है। सहायक पहलू बताती है — चल रहा, पूरा, योग्यता, जरूरत। सहायक अकेली काल नहीं है; वह संयुक्त क्रिया का टुकड़ा है। रहा/चुका/है को काल-नाम देना हो तो काल खोलो। यहाँ पूछें «किस तरह की क्रिया» तो उत्तर संयुक्त।

सहायक (झलक)कामउदाहरण
रहा / रही / रहेकाम चल रहालिख रहा है
चुका / लिया / डालापूरा / निपट गयाखा चुका, कर लिया, मार डाला
सकनायोग्यताआ सकता है
लगनाआरंभपढ़ने लगा
चाहिए / पड़नाजरूरतजाना चाहिए, पढ़ना पड़ा
जाना / आना (सहायक)निपटान / संयोगखा गया, गिर पड़ा, आ गया
है / था / होगाकाल की रीढ़जाता है, गया था
संयुक्त वाक्य ≠ संयुक्त क्रिया। वाक्य «राम आया और श्याम गया» दो क्रियाएँ, संयुक्त वाक्य। एक ही विधेय «खा लिया» = संयुक्त क्रिया। नाम एक, घर दो।

प्रेरणार्थक क्रिया

कर्ता काम स्वयं न करे, दूसरे से करवाए तो प्रेरणार्थक। हिंदी में अक्सर दो सीढ़ियाँ हैं।

मूलप्रथम प्रेरणार्थक (स्वयं सिखा/करा)द्वितीय (किसी और से करवा)
पढ़नापढ़ाना — अध्यापक पाठ पढ़ाता हैपढ़वाना — प्रधानाचार्य अध्यापक से पढ़वाते हैं
करनाकरानाकरवाना
खानाखिलानाखिलवाना
पीनापिलानापिलवाना
देखनादिखानादिखवाना
कटना / काटनाकटानाकटवाना

पहचान: आ / वा बीच में — पढ़ाना, पढ़वाना। अर्थ: कोई और काम कर रहा है, कर्ता प्रेरणा दे रहा है।

उदाहरण

खाना, खिलाना, खिलवाना — तीन नाम?

हल

  1. खाना

    स्वयं खाया → मूल सकर्मक।

  2. खिलाना

    माँ बच्चे को खिलाती है → प्रथम प्रेरणार्थक।

  3. खिलवाना

    पिता ने नौकर से बच्चे को खिलवाया → द्वितीय।

उत्तरमूल, प्रथम प्रेरणार्थक, द्वितीय प्रेरणार्थक

समापिका और असमापिका

समापिका = वाक्य यहीं पूरा: वह जाता है, उसने खाया, जाओ। काल–पुरुष से रूप बदलते हैं — तालिका काल पर।

असमापिका = काम अधूरा-सा, मुख्य क्रिया की जरूरत बाकी। तीन चेहरे परीक्षा में:

नामरूपउदाहरणकाम
पूर्वकालिककर / करकेखाकर सोया। नहाकर आया। पढ़कर लिखो।पहले यह, फिर मुख्य क्रिया
कृदंत विशेषणता हुआ / ई हुईसोता हुआ बालक। लिखा हुआ पत्र।संज्ञा को विशेषण जैसा
तुमुन् / ना–नेना / नेपढ़ने गया। खेलना अच्छा है।उद्देश्य; कक्षा-10 में «ना/ने», संस्कृत नाम तुमुन्

खाकर क्रिया है, पर वाक्य की समापिका «सोया» है। गिनती में दो काम, एक समापिका। संयुक्त वाक्य मत बना बैठना — «और» नहीं है।

विशेषण क्या है

विशेषण संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है — कैसा, कितना, कौन-सा, कितनेवें। जिसकी विशेषता बताई जाए वह विशेष्य।

लाल घोड़ा — लाल विशेषण, घोड़ा विशेष्य। दो किताबें — दो विशेषण। यह लड़का मेहनती है — यह सार्वनामिक विशेषण (लड़का के साथ), मेहनती गुणवाचक (विधेय में)। दोनों विशेषण हैं, एक ही भेद नहीं।

विकारी विशेषण लिंग–वचन से बदलते हैं (अच्छा लड़का, अच्छी लड़की, अच्छे लड़के) — नियम लिंग पर। तत्सम बहुत से अविकारी: सुंदर, योग्य, पवित्र — लड़का भी सुंदर, लड़की भी सुंदर।

विशेषण के चार भेद

भेदप्रश्नउदाहरण
गुणवाचककैसा / कैसीअच्छा, काला, वीर, मीठा, नया, पुराना, सुंदर, भारी, ईमानदार
संख्यावाचककितने / कितनेवेंनीचे चार घर — एक, पहला, दोनों, दुगुना
परिमाणवाचककितना (माप, तौल)थोड़ा दूध, बहुत पानी, दो किलो चीनी, पूरा घर, कुछ कपड़ा
सार्वनामिककौन-सा, संज्ञा के साथ सर्वनाम-शब्दयह लड़का, वह घर, कोई व्यक्ति, कौन सी किताब, अपनी बात

संख्यावाचक — चार कोठरी

कोठरीकामउदाहरण
निश्चितपक्की गिनतीएक, दो, दस, सौ, दोनों, चारों
अनिश्चितगिनती धुँधलीकुछ लड़के, कई लोग, थोड़े से आम, अनेक ग्रंथ
क्रमवाचकक्रम में स्थानपहला, दूसरा, तीसरा, अंतिम, पाँचवाँ
आवृत्ति / गुणनकितने गुनादुगुना, तिगुना, चौगुना, दोगुना वेतन
कुछ / बहुत दो घर। कुछ लड़के = अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण (गिनती)। कुछ दूध = परिमाण (माप, गिनती नहीं)। बहुत लोग संख्या के पास; बहुत पानी परिमाण। चीज़ गिनी जाती है या नापी? गिनी = संख्या, नापी = परिमाण।

विशेषण की तीन अवस्थाएँ

अवस्थाअर्थहिंदी ढंगतत्सम झलक
मूलावस्थागुण जैसा हैअच्छा, बड़ा, मीठा, उच्चउत्तम, गुरु
तुलनात्मकदो में तुलनाउससे अच्छा, अधिक बड़ा, अधिक मीठाउत्तमतर, गुरुतर, उच्चतर, श्रेष्ठतर
उत्तमावस्थासबमें सबसे ऊपरसबसे अच्छा, सबसे बड़ा, अत्यंत मीठाउत्तमतम, गुरुतम, उच्चतम, श्रेष्ठ

हिंदी रोज़मर्रा में तर/तम कम चलाती है; «उससे / सबसे / अधिक / अत्यंत» चलाती है। विकल्प में उच्चतम हो तो उत्तमावस्था। राम से मोहन बड़ा है — बड़ा तुलना पर है; «से» वाला राम अपादान है, बड़ा विशेषण की तुलनात्मक अवस्था।

क्रिया-विशेषण — विशेषण नहीं

विशेषण संज्ञा से चिपकता है। क्रिया-विशेषण क्रिया (कभी विशेषण/दूसरे क्रिया-विशेषण) से चिपकता है — काम कैसे, कब, कहाँ, कितना हुआ।

भेदप्रश्नउदाहरण
रीतिवाचककैसेधीरे चलो। शीघ्र आओ। अचानक गिरा। ध्यान से पढ़ो।
कालवाचककबकल आएगा। नित्य पढ़ता है। अभी रुको। कभी-कभी
स्थानवाचककहाँयहाँ बैठो। बाहर जाओ। ऊपर देखो। इधर-उधर
परिमाणवाचककितना (क्रिया पर)बहुत रोया। थोड़ा खाया। बिलकुल नहीं
निश्चय / निषेध—अवश्य आना। नहीं जाना। मत लिखो

एक सवाल: शब्द किससे चिपका है? संज्ञा से → विशेषण। क्रिया से → क्रिया-विशेषण। तेज घोड़ा (घोड़ा कैसा) विशेषण। तेज दौड़ता है (दौड़ता कैसे) क्रिया-विशेषण। अच्छा लड़का विशेषण। अच्छा गाता है क्रिया-विशेषण।

अधिकरण से मत मिलाओ। घर में संज्ञा+परसर्ग = अधिकरण कारक। भीतर / यहाँ अकेले = क्रिया-विशेषण। जगह एक-सी, शब्द-भेद अलग।

अव्यय — चार साथी (रूप नहीं बदलते)

क्रिया-विशेषण अव्यय है। परीक्षा अक्सर चार नाम एक साथ माँगती है। रूप लिंग–वचन से नहीं बदलते।

अव्ययकामउदाहरण
क्रिया-विशेषणक्रिया की विशेषताधीरे, कल, यहाँ, बहुत (क्रिया पर)
संबंधबोधकसंज्ञा के बाद रिश्ता (के + शब्द)के बिना, के साथ, की ओर, के कारण, के ऊपर, तक
समुच्चयबोधकशब्द या वाक्य जोड़नेऔर, तथा, या, पर, लेकिन, इसलिए, क्योंकि, यदि–तो
विस्मयादिबोधकभाव की आवाज़आह, ओह, वाह, हे! धिक्, शाबाश

संबंधबोधक और परसर्ग एक ही खेत काटते हैं। कारक पूछें तो कारक-नाम दो (के बिना ≈ अपादान/अभाव)। शब्द-भेद पूछें तो संबंधबोधक अव्यय।

हे राम! में राम संबोधन कारक है; हे चिह्न। आह! दर्द हुआ — आह विस्मयादिबोधक अव्यय, कोई संज्ञा नहीं पुकारी गई।

और / पर / क्योंकि से वाक्य जुड़ें तो रचना सरल–संयुक्त–मिश्र वाले पृष्ठ की है। यहाँ शब्द का नाम समुच्चयबोधक है।

सर्वनाम क्या है

सर्वनाम संज्ञा की जगह बैठता है, दोहराव काटता है। राम आया। वह थक गया। «वह» = सर्वनाम, राम की जगह।

मैंने / मुझे / मुझसे — ये कारक-रूप हैं, सूची कारक पर। उत्तम–मध्यम–अन्य और आप+बहु वचन — पुरुष पर। यहाँ भेद का नाम: पुरुषवाचक, निश्चयवाचक…

सर्वनाम के छह भेद

भेदकाममुख्य शब्द
पुरुषवाचकबोलने वाला, सुनने वाला, तीसरामैं, हम, तू, तुम, आप, वह, वे
निश्चयवाचकपक्का संकेत, पास/दूरयह, ये (पास); वह, वे (दूर) — अकेले
अनिश्चयवाचकपता नहीं कौन/क्याकोई, कुछ, किसी ने, कुछ लोग, कई
संबंधवाचकजो…वह जोड़जो, जो कोई, सो (पुराना), जितना–उतना
प्रश्नवाचकसवालकौन, क्या, कौन-सा, किसने, किसलिए, कब, कहाँ (सर्वनाम जब संज्ञा की जगह)
निजवाचकखुद / अपनास्वयं, खुद, आप (स्वयं अर्थ), अपना, अपनी, अपने

पुरुषवाचक — तीन पुरुष, नाम लिंग-पृष्ठ से छोटा

उत्तम: मैं, हम। मध्यम: तू, तुम, आप (आदर)। अन्य: वह, वे। «आप» आदर में मध्यम पुरुषवाचक है — वचन हमेशा बहु, वह कुंजी लिंग वाले पृष्ठ की।

कौन vs क्या

कौन प्राणी/व्यक्ति। क्या वस्तु/बात। कौन आया? क्या लाए? कौन-सा विकल्प में से चुनाव — अक्सर सार्वनामिक विशेषण (कौन-सी किताब)।

निजवाचक «आप» ≠ आदर «आप»

  • आदर: आप बैठिए — पुरुषवाचक मध्यम।
  • स्वयं: राम आप ही आ गए / वह आप आ गया — निजवाचक (खुद)।
  • अपना हमेशा निजवाचक विशेषण/सर्वनाम: मैं अपनी किताब लाया। रूप विशेष्य के लिंग–वचन से: अपना घर, अपनी माँ, अपने मित्र। कर्ता «मैं» से नहीं।

मेरा / मेरी / मेरे — विशेष्य से मेल

यह संबंध-रूप पुरुषवाचक का है, निजवाचक «अपना» से अलग घर। फिर भी परीक्षा मेल पूछती है। रूप उस संज्ञा से बदलता है जिसका संबंध बताया:

  • मेरा घर / बेटा — पुल्लिंग एकवचन।
  • मेरी किताब / माँ — स्त्रीलिंग।
  • मेरे मित्र / बच्चे — पुल्लिंग बहुवचन; मेरे पास में «मेरे» परसर्ग वाला रूप।

यह किताब मेरी है — «यह» सार्वनामिक विशेषण (किताब के साथ), «मेरी» संबंध-रूप स्त्रीलिंग। «मैं किताब» से मेरी नहीं बनता।

तीन जाल — एक शब्द, दो घर

1. यह / वह — सर्वनाम या विशेषण?

वाक्यआगे संज्ञा?नाम
यह आया। वह गया।नहीं, अकेलानिश्चयवाचक सर्वनाम
यह लड़का मेहनती है। वह घर पुराना है।हाँ, लड़का/घरसार्वनामिक विशेषण

2. कोई / कुछ / जो / कौन — वही कसौटी

अकेला (सर्वनाम)संज्ञा के साथ (सार्वनामिक विशेषण)
कोई आया। कुछ गिर गया। जो सोएगा वह खोएगा। कौन खड़ा है?कोई लड़का आया। कुछ दूध ठंडा है। जो व्यक्ति सोएगा… कौन आदमी खड़ा है?

3. अच्छा / तेज / बहुत — विशेषण या क्रिया-विशेषण?

संज्ञा से चिपकाक्रिया से चिपका
अच्छा लड़का, तेज घोड़ा, बहुत लोग, लाल फूलअच्छा गाता है, तेज दौड़ता है, बहुत रोया
उदाहरण

«यह आया» और «यह किताब» — यह कौन?

हल

  1. यह आया

    आगे संज्ञा नहीं, यह खुद कर्ता → निश्चयवाचक सर्वनाम।

  2. यह किताब

    किताब विशेष्य, यह उसकी पहचान → सार्वनामिक विशेषण।

उत्तरसर्वनाम, विशेषण
भूल-सूची। सोना देखकर सकर्मक मत लिखना। खा लिया = संयुक्त क्रिया, संयुक्त वाक्य नहीं। धीरे = क्रिया-विशेषण, गुणवाचक तभी जब «धीरे स्वर» जैसी संज्ञा हो। यह अकेला सर्वनाम, यह+संज्ञा विशेषण। आप आदर ≠ आप स्वयं। वाच्य (किया गया) यहाँ नहीं — परिवर्तन-पृष्ठ पर। उल्टा अर्थ — विलोम।

प्रश्न 1–10

प्र. 1

«राम सोया।» क्रिया?

  1. सकर्मक — ने गिरा है
  2. अकर्मक
  3. द्विकर्मक
  4. प्रेरणार्थक

हल

  1. क्या सोया?

    सवाल नहीं बनता। कर्म नहीं → अकर्मक। ने इसीलिए नहीं। खाना होता तो सकर्मक।

उत्तरB
प्र. 2

«सीता ने पत्र लिखा।» लिखना?

  1. अकर्मक
  2. सकर्मक
  3. केवल संयुक्त क्रिया
  4. निजवाचक

हल

  1. क्या लिखा

    पत्र = कर्म। एक कर्म = सकर्मक। सरल क्रिया भी है, पर भेद कर्म से पूछा गया।

उत्तरB
प्र. 3

«माँ बच्चे को खीर खिलाती है।» खिलाना?

  1. अकर्मक
  2. मूल क्रिया खाना ही
  3. प्रेरणार्थक
  4. क्रिया-विशेषण

हल

  1. खाना → खिलाना

    माँ स्वयं नहीं खा रही, बच्चे से/को खिला रही → प्रथम प्रेरणार्थक। खिलवाना द्वितीय होता।

उत्तरC
प्र. 4

«वह खा चुका है।» खा चुका?

  1. सरल क्रिया
  2. संयुक्त क्रिया
  3. संयुक्त वाक्य
  4. विशेषण

हल

  1. मुख्य + सहायक

    खाना + चुका। एक विधेय = संयुक्त क्रिया। संयुक्त वाक्य में और/पर + दो समापिका चाहिए।

उत्तरB
प्र. 5

«सुंदर फूल» में सुंदर?

  1. क्रिया-विशेषण
  2. गुणवाचक विशेषण
  3. परिमाणवाचक
  4. निश्चयवाचक सर्वनाम

हल

  1. फूल कैसा

    संज्ञा से चिपका गुण → गुणवाचक। धीरे खिलना होता तो क्रिया-विशेषण।

उत्तरB
प्र. 6

«वह धीरे चलता है।» धीरे?

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. क्रिया-विशेषण
  3. अधिकरण कारक
  4. सर्वनाम

हल

  1. चलता कैसे

    क्रिया से चिपका → क्रिया-विशेषण (रीति)। धीरे लड़का होता तो विशेषण। में/पर नहीं = कारक नहीं।

उत्तरB
प्र. 7

«पहला लड़का आया।» पहला?

  1. गुणवाचक
  2. क्रमवाचक संख्यावाचक विशेषण
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  4. परिमाणवाचक

हल

  1. क्रम में स्थान

    पहला/दूसरा = क्रमवाचक। एक/दो निश्चित संख्या। कुछ लड़के अनिश्चित।

उत्तरB
प्र. 8

«यह आया।» यह?

  1. सार्वनामिक विशेषण
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम
  3. संबंधवाचक
  4. निजवाचक

हल

  1. अकेला

    आगे संज्ञा नहीं। यह खुद कर्ता → निश्चयवाचक सर्वनाम। यह लड़का होता तो विशेषण।

उत्तरB
प्र. 9

«यह किताब मेरी है।» यह?

  1. निश्चयवाचक सर्वनाम
  2. सार्वनामिक विशेषण
  3. गुणवाचक
  4. क्रिया-विशेषण

हल

  1. यह + किताब

    विशेष्य किताब। सर्वनाम-शब्द विशेषण बन गया → सार्वनामिक विशेषण। मेरी भी सार्वनामिक/संबंध।

उत्तरB
प्र. 10

«मैं अपनी किताब लाया।» अपनी?

  1. पुरुषवाचक
  2. निजवाचक
  3. अनिश्चयवाचक
  4. प्रश्नवाचक

हल

  1. अपना घर

    स्वयं से संबंधित → निजवाचक। मैं पुरुषवाचक है, अपनी नहीं। कोई/क्या अलग भेद।

उत्तरB

अभ्यास

ये दस अलग कोण हैं — ऊपर वाले दस की नकल नहीं।

अ. 1

«गुरु ने शिष्य को पाठ पढ़ाया।» पढ़ाना कर्म की दृष्टि से?

  1. अकर्मक
  2. द्विकर्मक (और प्रेरणार्थक भी)
  3. केवल सरल अकर्मक
  4. क्रिया-विशेषण

हल

  1. दो

    पाठ = कर्म (चीज़), शिष्य = संप्रदान/गौण। द्विकर्मक। पढ़ना→पढ़ाना प्रेरणार्थक भी। विकल्प B दोनों पकड़ता है।

उत्तरB
अ. 2

«नहाकर मंदिर गया।» नहाकर?

  1. समापिका वर्तमान
  2. पूर्वकालिक असमापिका
  3. संयुक्त वाक्य का और
  4. गुणवाचक विशेषण

हल

  1. कर

    पहले नहाया, फिर गया। गया समापिका। नहाकर पूर्वकालिक। और नहीं = संयुक्त वाक्य नहीं।

उत्तरB
अ. 3

«कोई आया।» कोई?

  1. सार्वनामिक विशेषण
  2. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  3. निश्चयवाचक
  4. निजवाचक

हल

  1. अकेला

    संज्ञा साथ नहीं। अनिश्चित व्यक्ति → अनिश्चयवाचक सर्वनाम। कोई लड़का होता तो विशेषण।

उत्तरB
अ. 4

«जो परिश्रम करेगा वह सफल होगा।» जो?

  1. प्रश्नवाचक
  2. संबंधवाचक सर्वनाम
  3. निश्चयवाचक
  4. समुच्चयबोधक और

हल

  1. जो…वह

    जोड़ का सर्वनाम = संबंधवाचक। प्रश्न नहीं (कोई ? नहीं)। मिश्र वाक्य काल-पृष्ठ पर; शब्द का नाम यहाँ संबंधवाचक।

उत्तरB
अ. 5

«कौन द्वार पर है?» कौन?

  1. संबंधवाचक
  2. प्रश्नवाचक सर्वनाम
  3. अनिश्चयवाचक
  4. गुणवाचक

हल

  1. सवाल

    कौन अकेला, व्यक्ति पूछा → प्रश्नवाचक सर्वनाम। जो होता तो संबंध। कोई होता तो अनिश्चय, प्रश्न चिह्न के बिना।

उत्तरB
अ. 6

«यह आम सबसे मीठा है।» मीठा की अवस्था?

  1. मूलावस्था
  2. तुलनात्मक
  3. उत्तमावस्था
  4. क्रिया-विशेषण

हल

  1. सबसे

    सबमें ऊपर = उत्तम। उससे मीठा तुलना। मीठा अकेला मूल।

उत्तरC
अ. 7

«बहुत दूध फट गया।» बहुत?

  1. क्रिया-विशेषण — बहुत रोया जैसा
  2. परिमाणवाचक विशेषण
  3. क्रमवाचक
  4. पुरुषवाचक सर्वनाम

हल

  1. दूध कितना

    संज्ञा दूध से चिपका माप → परिमाणवाचक विशेषण। बहुत रोया में बहुत क्रिया पर = क्रिया-विशेषण।

उत्तरB
अ. 8

«राम स्वयं द्वार पर आया।» स्वयं?

  1. पुरुषवाचक आप आदर
  2. निजवाचक सर्वनाम
  3. निश्चयवाचक यह
  4. समुच्चयबोधक

हल

  1. खुद

    स्वयं/खुद/आप-स्वयं = निजवाचक। आप बैठिए आदर पुरुषवाचक अलग है।

उत्तरB
अ. 9

«मालिक नौकर से काम करवाता है।» करवाना?

  1. मूल क्रिया करना
  2. प्रथम प्रेरणार्थक कराना ही
  3. द्वितीय प्रेरणार्थक
  4. अकर्मक

हल

  1. वा

    करना → कराना प्रथम, करवाना द्वितीय (तीसरे से करवाना)। मालिक नौकर से = द्वितीय।

उत्तरC
अ. 10

«दरवाज़ा स्वयं खुला» और «उसने दरवाज़ा खोला»?

  1. दोनों सकर्मक
  2. खुलना अकर्मक, खोलना सकर्मक
  3. दोनों अकर्मक
  4. खुलना प्रेरणार्थक

हल

  1. स्वयं बनाम किसी ने

    खुला = अपने आप, कर्म नहीं। खोला = किसी ने कर्म किया। जोड़ी: जलना/जलाना, टूटना/तोड़ना।

उत्तरB

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